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सुषमा स्वराज जी का निधन

भारत की पूर्व विदेशमंत्री और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज का निधन हो गया है. पूर्व विदेश मंत्री और बीजेपी की सीनियर लीडर सुषमा स्वराज का दिल का दौरा पड़ने से दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया। वे 67 साल की थी और लंबे अर्से से बीमार चल रही थीं। वर्ष 2016 में सुषमा स्वराज का किडनी ट्रांसप्लांट भी हुआ था। बीमारी की वजह से ही उन्होंने 2019 लोकसभा चुनाव से खुद को अलग रखा था। वर्ष 2014 में सुषमा स्वराज को विदेश मंत्रालय का प्रभार मिला था। 

राष्ट्रीय स्तर पर (National – Level Politics)

राष्ट्रीय स्तर पर सुषमा स्वराज जी के राजनीतिक करियर की जानकारी इस प्रकार हैं –

·         वे 1977-1982 और 1987-1990 के दौरान दो बार हरियाणा से और 1998 में एक बार दिल्ली से विधायक बनीं।

  • अप्रैल 1990 में, सुषमा जी राज्य सभा की सदस्य के लिए चुनी गई, और वे तब तक इसकी सदस्य बनी रही, जब तक कि वे सन 1996 में दक्षिण दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र से 11 वीं लोकसभा के लिए नहीं चुन ली गई.

·         अक्टूबर 1998 में इन्होंने दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री का पद संभाला।

·         सुषमा जी सन 1996 में पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान सूचना और प्रसारण के लिए केन्द्रीय कैबिनेट मंत्री थी. इसके ठीक 2 साल बाद 1998 में सुषमा जी को फिर से लोकसभा सदस्य के लिए चुना गया, इस बार उन्हें दूरसंचार मंत्रालय के अलावा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का कार्यभार सौंपने के लिए शपथ दिलाई गई. इस अवधि के दौरान उनका सबसे उल्लेखनीय निर्णय फिल्म निर्माण को एक उद्योग के रूप में घोषित करना था, जिसने भारतीय फिल्म उद्योग को बैंक फाइनेंस के लिए योग्य बनाया. उन्होंने विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों में सामुदायिक रेडियो शुरू किये.

·         सन 1998 का अक्टूबर माह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण समय था, जब वे दूसरी ऐसी महिला बनी जोकि दिल्ली की मुख्यमंत्री नियुक्त हुई. जिसके चलते उन्होंने केन्द्रीय कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया. हालाँकि उस दौरान हरियाणा में भाजपा विधानसभा चुनाव हार गई थी. फिर बाद में उन्होंने पूरी तरह से अपनी विधानसभा सीट छोड़ते हुए, राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में लौटने का फैसला किया.

·         अगले साल 1999 में सितंबर में सुषमा जी एक बार फिर लोकसभा चुनाव में कर्नाटक के बेल्लारी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव में खड़ी हुई, यहाँ उनकी विरोधी सोनिया गाँधी जी थीं. उस समय सुषमा स्वराज जी ने स्थानीय कन्नड़ भाषा में जनसभाओं को संबोधित किया. हालाँकि वे इस चुनाव में जीत हासिल नहीं कर पाई थी.

·         सन 2000 से सन 2006 तक सुषमा जी यूपी की राज्यसभा सदस्य के रूप में सांसद बनी, और इस तरह से उन्होंने फिर से राज्य स्तर की राजनीति की तरफ अपना रुख किया. उन दौरान भी वे सूचना और प्रसारण मंत्री बनी और इस पद पर वे सन 2003 तक कार्यरत थी.

·         सन 2003 से 2004 तक स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और संसदीय मंत्री बनी. केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री के रूप में उन्होंने एमपी के भोपाल में, ओडिशा के भुवनेश्वर में, राजस्थान के जोधपुर में, बिहार के पटना में, छत्तीसगढ़ के रायपुर में और उत्तराखंड के ऋषिकेश आदि में 6 अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संसथान स्थापित किये.

·         सुषमा स्वराज जी यूपी से राज्यसभा सांसद बनने के बाद अगले 3 साल एमपी से राज्यसभा में अपने तीसरे कार्यकाल के लिए संसद की सदस्य बनी. अतः सुषमा जी सन 2009 तक राज्यसभा की सांसद बनी रही.

·         सुषमा जी सन 2009 में एमपी के विदिशा लोकसभा क्षेत्र से लोकसभा की सदस्य बनी. उसी साल दिसम्बर में उन्होंने लाल कृष्ण आडवाणी के स्थान पर लोकसभा में विपक्ष की नेता के रूप में बागडोर संभाली. मई सन 2014 तक वे लोकसभा सदस्य के पद पर कार्यरत थी. उस समय के आम चुनाव में उनकी पार्टी की यह बहुत बड़ी जीत थी.

·         मई 2014 मेंनरेंद्र मोदी जी के सत्ता में आने के बाद सुषमा स्वराज जी फिर लोकसभा की सदस्य बनी और उन्हें विदेश नीति को लागू करने के लिए कमान सौंपी गई. अतः उन्हें विदेश मंत्री नियुक्त किया गया. वे इंदिरा गाँधी जी के बाद इस पद को सँभालने वाली दूसरी महिला बनी.

 

 

                      सुषमा स्वराज को मिली उपलब्धियां (Awards and Achievements)

सुषमा स्वराज जी ने अपने जीवन में निम्न उपलब्धियां हासिल की –

·         हरियाणा के भाषा विभाग द्वारा आयोजित एक राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में सुषमा जी ने लगातार 3 वर्षों के लिए सर्वश्रेष्ठ हिंदी स्पीकर पुरस्कार प्राप्त किया था. साथ ही साथ 3 वर्षों के लिए उन्हें एसडी कॉलेज के एनसीसी का सर्वश्रेष्ठ कैडेट भी घोषित किया गया था.

·         सुषमा जी एसी बाली मेमोरियल घोषणा प्रतियोगिता में पंजाब विश्वविद्यालय की हिंदी में सर्वश्रेष्ठ स्पीकर भी बनीं, और उन्हें वहां यूनिवर्सिटी कलर अवार्ड से सम्मानित किया गया था.

·         वे सन 1990 से 2 साल तक मिजोरम की राज्यपाल रहीं. वे सन 1998 से 2004 तक संसद की सदस्य भी रहीं.

·         सुषमा स्वराज जी के द्वारा किये गये कार्यों के चलते इन्हें 2 बार सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार भी मिला है, वह पहली और अब तक की एक मात्र महिला सांसद हैं जिन्हें यह पुरस्कार मिला है.

 



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