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2 October Gandhi Jayanti

50th Gandhi Jayanti Highlightes |Gadhi Era | GANDHI SPECIAL | 


नाम- मोहनदास करमचन्द गॉधी

जन्म- 2 अक्टूबर 1869 (अन्तराष्ट्रीय अहिंसा दिवस)

स्थान- काठियावाड़ा, पोरबंदर, गुजरात

पिता- करमचन्द गॉधी उपनाम - काबा गॉधी

माता- पुतलीबाई

दादा- उत्तरचन्द गॉधी

पुत्र- हरिलाल, मणिलाल, रामदास, देवदास,

गोद- जमुनालाल बजाज भतीजा- मगन लाल गॉधी (सदाग्रह)

मृत्यु- 30 जनवरी 1948 (शहीद दिवस)

गुरू- गोपालकृष्ण गोखले (राजनैतिक)

शिष्या- मीरा बेन

आत्मकथा-‘’My Experiment With Truth’’

पर्सनल सिक्योरिटी- महादेव देसाई, प्यारे लाल

पुस्तकें- इंडिया ऑफ माई ड्रीम, अनासिक्त योग, गीता माता,                                      सात महाव्रत, हिन्द स्वराज (1909-गुजराती)

समाचार पत्र- इंडियन ओपिनियन (1903 साउथ अफ्रीका), द ग्रीन पैम्पलेट, यंग इंडिया (1919), हरिजन (1932)

प्रमुख उपनाम- राष्ट्रपिता- सुभाष चन्द बोस,

                        बापू- पं0 जवाहर लाल नेहरू

                        महात्मा- रवीन्द्रनाथ टैगोर

                       अर्धनग्न फकीर- विस्टन चर्चिल

                       वन मैन बाऊंड्री फोर्स- लॉर्ड माउण्ट बेटन

व्यक्तिगत चिकित्सक- डॉ0 सुशीला नैयर (प्यारे लाल की बहन)

1893 में गॉधी जी साउथ अफ्रीका गये क्योंकि दादा अब्दुला ने गॉधी जी को अपनी संपत्ति बचाने के लिये बुलाया था! साउथ अफ्रीका में रंग-भेद आन्दोलन चल रहा था! गॉधी जी ने पहली बार सत्याग्रह भूख हड़ताल साउथ अफ्रीका में ही की थी! इन्होंने 1894 में (नाटाल) के पास कांग्रेस की स्थापना की और दो नये आश्रम की स्थापना भी की--

(1) टॉलस्टाय - जोहान्सबर्ग (आश्रम)

(2) फोनिक्स - डरबन 1904 (आश्रम)

09 जनवरी 1915 को गॉधी जी भारत वापस आ गये इसलिये हम प्रत्येक 09 जनवरी को भारतीय प्रवासीय दिवस के रूप मनाते है! गॉधी जी दक्षिण अफ्रीका में लगभग 21 वर्ष रहे थे!

चम्पारन आंदोलन 1917 (बिहार) --

किसान राजकुमार शुक्ला के बुलाने पर गॉधी जी चम्पारन पहुॅचे क्योंकि अंग्रेज किसानों की जमीन के 3/20 भाग पर नील की खेती करवा रहे थे! जिसका पैसा भी किसानों को नहीं मिलता था इसे तीन कठियॉ पद्धति कहा जाता था! गॉधी जी, राजेन्द्र प्रसाद, महादेव देसाई, नरहरि पार्रिक, मजरूल उल् हक ने मिलकर यह आन्दोलन चलाया! यह आन्दोलन गॉधी जी के पक्ष में रहा अंग्रेजों ने अवैध वसूली का 25 प्रतिशत किसानों को वापस कर दिया! इस आंन्दोलन को जीतने के बाद रबीन्द्रनाथ टैगोर ने गॉधी जी को महात्मा की उपाधि दी! इसी दौरान जर्मनी ने कृत्रिम नील बना ली थी!

जुलाई 1917 में चम्पारन एग्रेरियन कमेटी का गठन किया गया!

पहली बार सविनय अवज्ञा का प्रयोग चम्पारन आंदोलन मे किया था! 

खेड़ा आंदोलन 22 मार्च 1918 (गुजरात) --

आकाल या सूखा पड़ जाने पर भी अंग्रेज किसानों से भूमि कर ले रहे थे गॉधी जी की यही पर बल्लभ भाई पटेल से मुलाकात हुई यह आंदोलन भी गॉधी जी के पक्ष में रहा!

अहमदाबाद मिल सत्याग्रह 15 मार्च 1918 --

गुजरात में प्लेग फैलने के कारण मिल के मालिकों ने मजदूरों का बोनस 50 प्रतिशत बढ़ा दिया लेकिन बढ़ती हुई मंहगाई के कारण यह बोनस बन्द कर दिया गया गॉधी जी के मित्र अंबालाल के सहयोग से यह 20 प्रतिशत बढ़ाया गया लेकिन मजदूरों ने मना कर दिया और भूख हड़ताल गॉधी जी के साथ शुरू कर दी अनुसुईया के सहयोग से अन्त में 35 प्रतिशत बोनस बढ़ पाया इसे प्लेग बोनस कहा जाता है!

1591 में हैदराबाद के निजाम मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने प्लेग बिमारी के दौरान ही चार मिनार का निर्माण करवाया था इसलिये चार मिनार को प्लेग इमारत भी कहा जाता है! 

बैद्य का नाम -- पीर मोहम्मद 

प्रथम विश्व युद्ध में अंग्रेजों की मदद करने कारण

गॉधी जी को सार्जेंट ऑफ ब्रिटिशस कहा गया

18 मार्च 1919 को रोलेट एक्ट पास हुआ जिसके तहत किसी भी भारतीय को संदेह होने पर गिरफ्तार कर सकते थे!

रोलेट एक्ट के 3 अन्य नाम थे--

(1) काला कानून

(2) आतंकवाद कानून

(3) बिना अपील, बिना वकील, बिना दलील

इस एक्ट का विरोध दिल्ली में स्वामी श्रद्धानंद जी ने किया पंजाब में डॉ० सत्यपाल व सैफुद्दीन कीचलू ने किया था! गॉधी जी को पंजाब जाते समय पलवल में पकड़ लिया गया और वापस बम्बई छोड़ दिया गया! पंजाब के जुलुस में 2 अंग्रेज मार दिये गये!

(1) शेरवुड (2) रोलॅण्ड्स

पंजाब को दबाने के लिये गर्वनर जनरल REH डॉयर LEFTING IN जनरल MO डॉयर पंजाब आये! इन्होंने 298 लोगो को मारकर दो नेताओं को गिरफ्तार कर लिये अपने नेताओं को छुड़ाने के लिये जलियावाला बाग अमृतसर 13 अप्रैल 1919 वैशाखी के दिन शाम 04ः30 एक सम्मेलन रखा गया लेकिन इस बात की जानकारी डॉ० हंसराज ने डॉयर को दे दी परिणाम जलियावाला बाग हत्याकांड!

मदन मोहन मालवीय के अनुसार -- (तहकीकात कमेटी)

1000 लोग मरे 3000 हजार लोग घायल हो गये!

हन्टर कमेटी के अनुसार -- 

369 लोग मरे और 1200 घायल हो गये! इसी दौरान पंजाब में चमनदीप ने डंडा फौज बनाई थी!

हन्टर कमेटी के अनुसार --

हन्टर कमेटी में पॉच अंग्रेज और 3 भारतीय शामिल थे!

जैसे --

अंग्रेज                                                                  भारतीय

  HUNTER हन्टर                                    सीतल चिमनवाड़ा

SMITH स्मिथ                                           सुल्तान अहमद

BARROW बारो                                       जगत नारायण

RICE राइस

RAXIN रैक्सीन

खिलाफत आंदोलन (1919-1920) --

ब्रिटेन ने टर्की पर हमला कर दिया और खलीफा के पद को समाप्त कर दिया दोनो के बीच सीवर्स की संधि हुई थी खलीफा के पद को बचाने के लिये टर्की में अली मुसलियार ने खिलाफत आंदोलन चलाया भारत में इसके प्रमुख नेता मोहम्मद अली, शौकत अली, अबुल कलाम आजाद, अंसारी थे!

ALL INDIA खिलाफत कमेटी के अध्यक्ष गॉधी जी बने मुस्तफा कमाल पासा ने खलीफा के पद को पूरी तरह समाप्त कर दिया!

असहयोग आंदोलन (1920-1922) --

1 अगस्त 1920 को बाल गंगाधर के मृत्यु के साथ ही यह आंदोलन शुरू हो गया इस आंदोलन में गिरफतार होने वाले पहले नेता मोहम्मद अली व चितरंजन दास बने! आंदोलन को चलाने के लिये 1 करोड़ रू0 के साथ तिलक स्वराज फंड की स्थापना की गयी, 20 लाख चर्खे देश में बाटे गये क्योंकि इस आंदोलन का प्रतीक चिन्ह चरखा और खादी था! गॉधी जी ने कहा कि एक वर्ष के भीतर स्वराज्य दिला दूंगा! लेकिन जिसकी कुछ शर्ते थी-- 

सरकारी स्कूल, कालेज, वकालत, विधान सभा, विधान परिषद, सरकारी नौकरी, विदेशी कपड़ो को छोड़ देना! 

सर्वाधिक स्कूल बंगाल और पंजाब में छोड़ें गयें जबकि सबसे कम मद्रास में छोड़े गये! 

5 फरवरी 1922 उत्तर प्रदेश, गोरखपुर चौरी-चौरा स्थान पर लोगो ने पुलिस चौकी में आग लगा दी जिसमें 21 सिपाही और 1 थानेदार मारे गये इसे चौरी चौरा काण्ड़ कहा जाता है! आन्दोलन को हिंसा से बचाने के लिये 19 फरवरी 1922 को गुजरात के बारदोली में गॉधी जी ने यह आन्दोलन बन्द कर दिया! 10 मार्च 1922 को गिरफ्तार हो गये! न्यायाधीश ब्रूमफील्ड ने इन्हें 6 वर्ष की सजा सुनाई! लेकिन स्वास्थ्य खराब होने के कारण इन्हे 5 फरवरी 1924 को छोड़ दिया गया!

स्वराज्य पार्टी 1923 (इलाहाबाद) --

इस पार्टी की स्थापना चितरंजन दास (अध्यक्ष), मोतीलाल नेहरू (सचिव), सुभाष चन्द बोस, विठ्ल भाई पटेल, एम आर जैकर ने मिलकर की! 1923 की चुनाव में इस पार्टी को 101 में 42 सीटें प्राप्त हुई पहली बार सेन्ट्रल असेम्बली (केन्द्रीय विधान सभा) का अध्यक्ष एक भारतीय बना! विठ्ल भाई पटेल, नगर निगम के चुनाव में भारतीयों को मेयर बनाया गया!

जैसे --

चितरंजन दास - कलकत्ता

विठ्ल भाई पटेल - अहमदाबाद

राजेन्द्र प्रसाद - पटना

जवाहर लाल नेहरू - इलाहाबाद

HINDUSTAN ASSOCIATION REPUBLICON (1924) --

कानपुर इस पार्टी की स्थापना--

शचीन्द्र सन्याल, चन्द्रशेखर आजाद, रौशन सिंह (इलाहाबाद में फॉसी), जोगेश चटर्जी, राजेन्द्र लाहिड़ी (गोंडा में फॉसी), रामप्रसाद बिस्मिल (गोरखपुर में फॉसी), अशफाक उल्ला खॉ (फैजाबाद में फॉसी) जैसे नेताओं ने मिलकर की इन्होंने 9 अगस्त 1925 को काकोरी ट्रेन लूटी और पकड़े गये! इन पर काकोरी कांड मुकदमा चलाया गया! 1927 में 4 लोगो को फॉसी और अंडमान की सेलुलर (काला पानी) जेल में भेज दिया गया!

भगत सिंह ने नौ जवान फौज की स्थापना की थी!

HINDUSTAN SOCIALIST REPUBLIC ASSOCIATION (1928) -

इस पार्टी की स्थापना भगत सिंह, राजदेव गुरू, बटुकेश्वर दत्त, जतिन दास, जैसे लोगो ने मिलकर की इन्होंने अपना पहला निशाना लाहौर के पुलिस अधिकारी जेपी सान्डर्स को बनाया जब की ये मारने जॉन स्कॉट को गये थे!

8 अप्रैल 1929 को पब्लिक सेफटी बिल के विरोध में भगत सिंह, और बटुकेश्वर दत्त ने मिलकर असेम्बली पर बम फेक दिया इन्हें लाहौर षडयंत्र में शामिल करके जी०सी० हिल्टन ने 23 मार्च 1931 को लाहौर जेल में फॉसी सुना दी! लेकिन इससे पहले ही 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फेड पार्क में चन्द्रशेखर आजाद ने स्वयं को गोली मार ली!

सरफरोशी की तमन्ना - रामप्रसाद बिस्मिल

वारसाड़ आंदोलन (1923-1924) -- 

गुजरात के वारसाड़ में अंग्रेज ने 2 रूपये 7 आना का डकैती कर लगा दिया जिसके लिये यह आंदोलन चलाया गया!

वायकोम सत्याग्रह (1924-1925) -- 

केरल के त्रावणकोर मंदिर में अछूतो के प्रवेश को लेकर यह आंदोलन के० केलप्पन, टी० के० माधवन, के० पी० केशव मेनन ने चलाया! गॉधी जी ने अछूतों के लिये अलग सड़क बनवा दिया और यह आंदोलन समाप्त हो गया!

वारदोली सत्याग्रह (1928) -- 

गुजरात के वारदोली में जमींदारो की खेती कालीपराज आदिवासी किया करते थे! इन पर 30 प्रतिशत टैक्स लगा दिया गया जो कि अवैध था! बल्लभ भाई पटेल की सहायता से यह 30 प्रतिशत से घटकर 6.23 रह गया!

तब गॉधी जी ने वारदोली की महिलाओं की ओर से बल्लभ भाई पटेल को सरदार पटेल की उपाधि दी! कालीपराज का नाम रानीपराज कर दिया गया!

साइमन कमीशन (1927-1929) --

भारत में संवैधानिक सुधार करने के लिये सर जॉन साइमन की अध्यक्षता में 7 अंग्रेज सदस्य 3 फरवरी 1928 को बंबई पहुॅचे जहॉ गॉधी जी ने इस कमीशन का विरोध किया! “GO BACK SAIMAN COMMISSION” के नारे लगाये! यह विरोध इस लिये किया जा रहा था क्योंकि इस कमीशन में कोई भी भारतीय सदस्य शामिल नहीं था इसलिये इसे WHITE MAN COMMISSION भी कहा गया!

लखनऊ में - खलीकुज्जमा

मद्रास में - टी० प्रकाशन

लाहौर में - लाला लाजपत राय

ने इस कमीशन का विरोध किया! जिस दौरान लाहौर में लाठी चार्ज कर दी गयी! जिसमें लाला लाजपत राय घायल हुये! 17 नवंबर 1928 को इनकी मृत्यु हो गयी!


साइमन कमीशन का सहयोग देने वाली पार्टी --

(1) पंजाब की कम्यूनिस्ट पार्टी

(2) मद्रास की जस्टीस पार्टी

(3) मुस्लिम लींग सफीगुट

लाहौर अधिवेशन 1929 --

कांग्रेस के अध्यक्ष जवाहर लाल नेहरू 31 दिसंबर 1929 को लाहौर में रावी नदी के किनारे झंडा फहराया! जवाहर लाल नेहरू ने अपने भाषण में कहा--

मैं एक समाजवादी और गणतंत्र वादी हूॅ!

26 जनवरी 1930 को पहली बार पूर्ण स्वराज्य प्रस्ताव पास हुआ! जिसे प्रथम स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया गया!

सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) -- वायसराय - लॉर्ड इरविन

गॉधी जी की मॉगें-

1- नमक कानून तोड़ा जाये!

2- सभी राजनैतिक बन्दी छोड़े जाये!

3- सैनिको के खर्चे में 50 प्रतिशत की कटौती की जाये!

4- तट पर विधेयक लाया जाये!

5- शराब की दुकाने बन्द की जाये!

6- विदेशी कपड़ो को जलाया जाये!

7- आत्मरक्षा के लिये हथियार रखने दिया जाये!

दॉडी यात्रा --

साबरमती आश्रम - दॉडी गुजरात 

1- कुल दुरी 375/390 कि0मी0

2- 12 मार्च 1930 - 6 अप्रैल 1930 (कुल - 24 दिन)

3- कुल प्रतिनिधि - 78 भारतीय, 1 (महात्मा गॉधी), +1 अमेरिका के अखबार NEW FREE MAN का संपादक वेव मिलर

कुल अन्य दॉडी यात्रायें --

1- तमिलनाडू - राजा जी चक्रवर्ती राजगोपालाचारी

2- केरल - वायकोम सत्याग्रह के नेता

3- उड़ीसा - गोपी चन्द 

सुभाषचन्द बोस ने गॉधी जी की दॉडी यात्रा को नेपोलियन के पेरिस मार्च और इसे मुसोलिनी के रोम मार्च से जोड़ा है!

महात्मा गॉधी ने भारत में अपना पहला जनभाषण फरवरी 1916 में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के उद्घाटन समारोह के अवसर पर दिया था!

महात्मा गॉधी का कथन--

गलत साधन हमें कभी भी सही उद्देश्य तक नहीं ले जाते है!

नोट--

यरवदा कारागार (महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित) में गांधी जी को वर्ष 1930 में बंदी के रूप में भेजा गया था! यरवदा कारागार को गांधी जी ने मंदिर की संज्ञा दी है!

गॉधी जी की मृत्यु 30 जनवरी, 1948 को हुयी!

उनकी मृत्यु पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पं0 जवाहर लाल नेहरू ने कहा था --

हमारे जीवन से प्रकाश चला गया है, हमारे चारो तरफ अंधकार ही अंधकार है, मैं नहीं समझ पा रहा हूँ कि आपसे क्या कहूँ और कैसे कहूँ?

राष्ट्रपिता........!

जिन्हें हम प्यार से बापू कहते थे, वो अब हमारे बीच नहीं रहें!



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