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बिहार की वनस्पति

  • बिहार के सम्पूर्ण भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 7.1 प्रतिशत भाग पर वनाच्छादित है। राज्य की 6,764.14 वर्ग किमी भूमि वनों से घिरी है।
  • बिहार में 12 आरक्षित वन है।
  • बिहार में प्रति व्यक्ति वन भूमि का औसत 0.01 हेक्टेयर है जो कि राष्ट्रीय औसत (0.08 हेक्टेयर) से बहुत कम है।
  • बिहार की प्राकृतिक वनस्पति में मुख्यतः पर्णपाती किस्म के वन पाए जाते हैं।
  • पर्यावरण एवं वन विभाग, बिहार सरकार के आंकड़े के अनुसार बिहार में कुल वन क्षेत्र, कुल भौगोलिक क्षेत्र का मात्र 7.27% है जबकि वन स्थिति रिपोर्ट, 2017 के अनुसार कुल वन क्षेत्र कुल भौगोलिक क्षेत्र का 7.75% है।
  • बिहार के वनों से तेन्दू पत्तियाँ, लाख, गोंद, साल के बीज और इमारती लकड़ी मिलती है।
  • बिहार में दो वनस्पति प्रदेश हैं - उत्तरी उप हिमालय के तराई वन और शुष्क पर्णपाती वन।

ऊपरी हिमालय एवं तराई वनः इस प्रकार का वन चम्पारण जिले में सोमेश्वर व दून की श्रेणियों तथा सहरसा व पूर्णिया के तराई क्षेत्र में पाया जाता है। यहां उपोष्ण अर्ध पर्णपाती वन पाये जाते है। प्रमुख वृक्षों में साल, शीशम, तून, खैर, चीड़ व पाइन (कम मात्रा में) आदि पाया जाता है।

शुष्क पर्णपाती वनः ये वन बिहार के पूर्वी मध्यवर्ती भाग एवं दक्षिणी पठार के पश्चिमी भाग पर कम वर्षा वाले क्षेत्रों में पाये जाते है। प्रमुख वृक्ष अमलतास, बेहड़ा, खैर, शीशम, पलास, महुआ, साल, बबूल आदि है।

  • मैदानी भागों में उपवन या पार्क लैंड तथा फलदार वृक्षों के बगीचे (आम एवं लीची) भी पाए जाते हैं।
  • बिहार में वन उत्पादों का एकत्रीकरण एवं विपणन बिहार राज्य विकास निगम करता है।

बिहार के वनों से प्राप्त होने वाली सामग्री

  • लाख के उत्पादन में बिहार का देश में प्रथम स्थान है। लाख के कीड़े लैसीफर लक्का या लैक-बैग जाति के होते हैं। ये कीड़े कुसुम, फ्लास, गूलर, बरगद, खैर, रीठा, पीपल व बबूल के पेड़ों की नरम डालों के रस को चूसकर लाख बनाते हैं।
  • शीशम के वन दक्षिणी-पूर्वी बिहार में पाए जाते हैं। इसकी लकड़ी का उपयोग मकान, फर्श तथा फर्नीचर बनाने और रेल के डिब्बों में किया जाता है।
  • तून  की लकड़ी मजबूत होती है। इसका उपयोग फर्नीचर, घरेलू सामान, चाय की पेटियाँ, खिलौने आदि बनाने में होता है।
  • सेमल की लकड़ी भी वनों से प्राप्त होती है इसका उपयोग तख्ते और खिलौने बनाने में होता है।
  • बिहार में साल के वनों से साल की लकड़ी प्राप्त होती है। इसका प्रयोग रेल के डिब्बों, लकड़ी की पेटियों, तम्बू, पुल, खम्बे, खिड़कियाों आदि के बनाने में होता है।

राज्य के भौगोलिक क्षेत्र का वन एवं वृक्ष आच्छादन - 10.15%

भारत के भौगोलिक क्षेत्र का वन एवं वृक्ष आच्छादन - 1.19%

प्रति व्यक्ति वन एवं वृक्ष आच्छादन - 0.01 हेक्टेयर



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