नवीन राज्यों का उदय

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क्षेत्रीय राज्य - पंजाब एवं मैसूर

क्षेत्रीय राज्य - पंजाब एवं मैसूर


प्रथम आंग्ल मैसूर युद्धअंग्रेज गवर्नर वेरेल्स्ट1767 - 69 मद्रास की संधि
द्वितीय आंग्ल मैसूर युद्धअंग्रेज गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स1780 - 84 मंगलौर की संधि
तृतीय आंग्ल मैसूर युद्धअंग्रेज गवर्नर जनरल लार्ड कार्नवालिस1790 - 92 श्री रंगपट्टम की संधि
चतुर्थ आंग्ल मैसूर युद्धअंग्रेज गवर्नर जनरल लार्ड वेलेजली1798 - 99 टीपू पराजित हुआ सदस्यों को वेल्लौर में कैद

रणजीत सिंह किस मिसल से संबंधित थे - सुकरचकिया

  • रणजीत सिंह का जन्म 2 नवंबर, 1780 को सुकरचकिया मिसल के मुखिया महासिंह के घर हुआ था।
  • महाराजा रणजीत सिंह और अंग्रेजों के बीच 25 अप्रैल, 1809 को अमृतसर की संधि हुई।
  • रणजीत सिंह ने 1818 में मुल्तान, 1819 में कश्मीर और 1834 में पेशावर को जीत लिया।

महाराजा रणजीत सिंह के राज्य की राजधानी थी - लाहौर

  • 1798 में जमानशाह ने पंजाब पर आक्रमण किया।
  • वापस जाते समय उसकी तोपें चिनाब नदी में गिर गई।
  • रणजीत सिंह ने उन्हें निकलवा कर वापस भिजवा दिया।
  • उस सेवा के बदले जमानशाह ने उसे लाहौर पर अधिकार करने की अनुमति दे दी।
  • 1799 में रणजीत सिंह ने तत्काल लाहौर पर अधिकार कर लिया तथा उसे अपनी राजधानी बनाया।
  • इस विजय के बाद रणजीत सिंह की प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई।
  • उसने 1805 में अमृतसर को भी भंगी मिसल से छीन लिया।
  • उसके बाद पंजाब की राजनैतिक राजधानी (लाहौर) और धार्मिक राजधानी (अमृतसर) दोनों ही उसके अधीन आ गई।

सिक्ख राज्य का अंतिम राजा कौन था - दलीप सिंह

  • महाराजा दलीप सिंह सिक्ख साम्राज्य के अंतिम शासक थे।
  • उन्होंने 1843 से 1849 ई. तक शासन किया।

रणजीत सिंह ने सुप्रसिद्ध कोहिनूर हीरा प्राप्त किया था - शाहशुजा से

  • पंजाब अहमदशाह अब्दाली के साम्राज्य का भाग था, लेकिन 1773 में उसकी मृत्यु के बाद मुल्तान, कश्मीर इत्यादि कुछ छोटे - छोटे भागों को छोड़कर शेष पर सिख मिसलों का अधिकार हो गया।
  • उधर अफगानों के आंतरिक झगड़ों के कारण रणजीत सिंह को अपनी स्थिति दृढ़ करने का अवसर मिल गया।
  • 1800 में अहमदशाह अब्दाली का पौत्र शाहशुजा काबुल की गद्दी पर बैठा लेकिन उसके भाई शाह महमूद ने शक्तिशाली बरकजई सरदारों - फतह खां और दोस्त मुहम्मद की सहायता से उसे 1809 में विस्थापित कर दिया तथा स्वयं कश्मीर और पेशावर पर अधिकार कर लिया।
  • इसी अवसर पर शाहशुजा ने काबुल का राज्य प्राप्त करने के लिए रणजीत सिंह से सहायता मांगी और उन्हें कोहिनूर (कोह - ए - नूर) हीरा भेंट किया।

महाराजा रणजीत सिंह के उत्तराधिकारी थे - खड्ग सिंह

  • 1839 में रणजीत सिंह की मृत्यु के बाद उनका पुत्र खड्ग सिंह सिंहासन पर बैठा।
  • इसे अफीम खाने की आदत थी।
  • इसके शासनकाल के दौरान शीघ्र ही दरबार में दो विरोधी दलों संधावालिया सरदार - चैतसिंह, अतर सिंह, लहना सिंह तथा उनके भतीजे अजीत सिंह और डोगरा बंधुओं - ध्यान सिंह, गुलाब सिंह और सुचेत सिंह की प्रतिद्वंद्विता के कारण पंजाब में अराजकता फैल गई।

किसने कहा था, ईश्वर की इच्छा थी की मैं सब धर्मों को एक निगाह से देखूं, इसलिए उसने दूसरी आंख की रोशनी ले ली - महाराजा रणजीत सिंह

  • रणजीत सिंह का जन्म 2 नवंबर, 1780 को सुकरचकिया मिसल के मुखिया महासिंह के घर हुआ था।
  • वह 12 वर्ष के ही थे कि उनके पिता का स्वर्गवास हो गया।
  • 1792 से 1797 तक एक प्रतिशासन परिषद (Council of Regency) जिसमें इनकी माता, सास और दीवान लखपत राय थे, ने शासन कार्य चलाया।
  • 1797 में उन्होंने समस्त कार्यभार स्वयं संभाल लिया।
  • रणजीत सिंह एक योग्य शासक थे।
  • उन्होंने कहा था - ईश्वर की इच्छा थी कि मैं सब धर्मों को एक निगाह से देखूँ इसीलिए उसने दूसरी आंख की रोशनी ले ली।

पंजाब के पूर्व महाराजा दलीप सिंह का निधन कब और कहां हुआ था - 23 अक्टूबर, 1893 को उनका निधन पेरिस में हुआ

  • पंजाब के पूर्व महाराजा दलीप सिंह का निधन 23 अक्टूबर, 1893 को पेरिस 
    (फ्रांस) में हो गया था।
  • दलीप सिंह ने सिक्ख धर्म छोड़कर ईसाई धर्म को अपनाया था, इन्होंने रुस की यात्रा भी की थी।
  • इनकी अंतिम संस्कार इंग्लैण्ड में हुआ था।

महाराजा रणजीत सिंह किस नाम से प्रसिद्ध थे - शेर-ए-पंजाब

  • रणजीत सिंह का जन्म 2 नवंबर, 1780 को सुकरचकिया मिसल के मुखिया महासिंह के घर हुआ था।
  • सिक्ख साम्राज्य के सर्वाधिक प्रसिद्ध राजा थे।
  • वे शेर-ए-पंजाब के नाम से प्रसिद्ध हैं।
  • महाराजा रणजीत सिंह ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने न केवल पंजाब को एक सशक्त सूबे के रुप में एकजुट रखा, बल्कि अपने जीवित रहते हुए अंग्रेजों को अपने साम्राज्य के पास भी नहीं फटकने दिया।
  • 12 अप्रैल, सन् 1801 को रणजीत सिंह ने महाराजा की उपाधि ग्रहण की थी।
  • गुरु नानक के एक वंशज ने उनकी ताजपोशी संपन्न कराई थी।
  • उन्होंने लाहौर को अपनी राजधानी बनाया और 1802 में अमृतसर की ओर रुख किया।
  • ब्रिटिश इतिहासकार जे.टी. व्हीलर के अनुसार ---- अगर वह एक पीढ़ी पुराने होते, तो पूरे हिन्दुस्तान को ही फतेह कर लेते।
  • महाराजा रणजीत सिंह पढ़े - लिखे नहीं थे - लेकिन उन्होंने अपने राज्य में शिक्षा और कला को बहुत प्रोत्साहन दिया।
  • उन्होंने पंजाब में कानून एवं व्यवस्था कायम की और कभी भी किसी को सजा-ए-मौत नहीं दी।

प्रथम आंग्ल - मैसूर युद्ध में कौन विजयी हुआ - हैदर अली

  • प्रथम आंग्ल - मैसूर युद्ध (1767 - 69) अंग्रेजों और हैदर अली के मध्य हुआ था।
  • निजाम, मराठे एवं अंग्रेज हैदर के विरुद्ध एक त्रिगुट संधि में सम्मिलित हुए।
  • हैदर ने अपनी कूटनीतिक सूझ - बूझ से इस त्रिगुट को भंग करने का प्रयास किया।
  • उसने मराठों को धन देकर और निजाम को प्रदेश का प्रलोभन देकर अपनी ओर मिला लिया और फिर कर्नाटक पर आक्रमण किया।
  • अंग्रेजों की प्रारंभिक सफलता के कारण निजाम पुनः अंग्रेजों की ओर चला गया।
  • हैदर अली ने उत्साहपूर्वक लड़ते हुए 1768 ई. में मंगलौर पर अधिकार कर लिया।
  • मार्च, 1769 में उसकी सेनाएं मद्रास तक जा पहुँची।
  • अंग्रेजों ने विवशता में हैदर अली की शर्तों पर 4 अप्रैल, 1769 को मद्रास की संधि की।

द्वितीय मैसूर युद्ध कब प्रारंभ हुआ - 1780 - 84

  • अंग्रेजों ने 1769 ई. की संधि की शर्तों के अनुसार आचरण न किया और 1770 ई. में हैदर अली को, समझौते के अनुसार उस समय सहायता न दी जब मराठों ने उस पर आक्रमण किया।
  • अंग्रेजों के इस विश्वासघात से हैदर अली को अत्यधिक क्षोभ हुआ था।
  • उसका क्रोध उस समय और भी बढ़ गया, जब अंग्रेजों ने हैदर अली की राज्य सीमाओं के अंतर्गत माही की फ्रांसीसी बस्तीपर आक्रमण कर अधिकार कर लिया।
  • उसने मराठा और निजाम के साथ 1780 ई. में त्रिपक्षीय संधि कर ली जिससे द्वितीय मैसूर युद्ध प्रारंभ हुआ।

अंग्रेजों ने श्रीरंगपट्टनम की संधि किसके साथ की थी - टीपू सुल्तान

  • तृतीय आंग्ल मैसूर युद्ध (1790 - 92) का अवसान श्रीरंगपट्टनम की संधि (मार्च, 1792) द्वारा हुआ।
  • इस संधि में अंग्रेजों की ओर से कार्नवालिस तथा मैसूर से टीपू सुल्तान शामिल थे।
  • इसके अनुसार, टीपू को अपने राज्य का लगभग आधा भाग अंग्रेजों तथा उनके साथियों को देना पड़ा।
  • साथ ही युद्ध के हर्जाने के रुप में टीपू को तीन करोड़ रुपये अंग्रेजों को देना था।
  • श्रीरंगपट्टनम की संधि में यह शामिल था कि जब तक टीपू तीन करोड़ रुपये नहीं देगा तब तक उसके दो पुत्र अंग्रेजों के कब्जे में रहेंगे।
  • कार्नवालिस ने इसी संधि के बाद यह टिप्पणी की थी - हमने अपने शत्रु को प्रभावशाली ढ़ग से पंगु बना दिया है तथा साथियों को भी शक्तिशाली नहीं बनने दिया।

टीपू सुल्तान अंग्रेजों के साथ युद्ध में कब मारे गए - 1799

  • टीपू सुल्तान चतुर्थ आंग्ल - मैसूर युद्ध (1799) के दौरान अंग्रेजों से लड़ते हुए मारा गया।
  • इसकी मृत्यु के साथ ही मैसूर की स्वतंत्रता के इतिहास के गौरवशाली अध्याय का समापन हो गया।
  • इस युद्ध के समय अंग्रेजी सेना को वेलेजली और स्टुअर्ट अपना नेतृत्व प्रदान किया।
  • मैसूर को जीतने की खुशी में आयरलैंड के लार्ड समाज ने वेलेजली को मार्क्विस की उपाधि प्रदान की।
  • युद्ध के बाद अंग्रेजों ने मैसूर की गद्दी पर पुनः अड्यार वंश के एक बालक कृष्णराय को बिठा दिया तथा कनारा, कोयम्बटूर और श्रीरंगपट्टनम को अपने राज्य में मिला लिया।

ब्रिटिश जनरल जिसने हैदर अली को पोर्टोनोवो के युद्ध में हराया - सर आयरकूट

  • द्वितीय आंग्ल - मैसूर युद्ध (1780 - 84 ई.) के दौरान, हैदर अली ने निजाम तथा मराठों के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध एक मोर्चा बनाया।
  • जुलाई, 1780 में हैदर अली ने कर्नाटक पर आक्रमण कर दिया तथा कर्नल बेली के अधीन अंग्रेजी सेना को हराकर अर्काट पर अधिकार कर लिया।
  • अंग्रेजों ने निजाम तथा मराठों को हैदर अली से अलग कर लिया।
  • हैदर अली ने दृढ़तापूर्वक इस स्थिति का सामना किया।
  • 1781 में हैदर अली का सामना अंग्रेज जनरल आयरकूट से हुआ, जिसने पोर्टोनोवो के युद्ध में (नवंबर, 1781) हैदर अली को परास्त किया।

भारतीय शासकों में से कौन था जिसने विदेशों में आधुनिक पद्धति से दूतावास स्थापित किए थे - टीपू सुल्तान

टीपू सुल्तान ने अपनी राजधानी बनाई - श्रीरंगपट्टनम में

  • टीपू सुल्तान ने श्रीरंगपट्टनम को अपनी राजधानी बनाया एवं यहाँ जैकोबिन क्लब की स्थापना की और उसका सदस्य बना, साथ ही उसने अपनी राजधानी में फ्रांस और मैसूर की मैत्री का प्रतीक स्वतंत्रता का वृक्ष रोपा।
  • टीपू सुल्तान ने अपने समकालीन विदेशी राज्यों से मैत्री संबंध बनाने तथा अंग्रेजों के विरुद्ध उनकी सहायता प्राप्त करने के लिए - अरब, कुस्तुन्तुनिया/(आधुनिक इस्तांबुल), काबुल और मॉरीशस को दूतमंडल भेजे और आधुनिक रीति पर दूतावासों की स्थापना की।

टीपू सुल्तान ने ब्रिटिश सेना को 1780 में हराया था - पोलीलुर में

  • हैदर अली एवं टीपू सुल्तान ने मराठों तथा निजाम के साथ एक समझौता कर लिया तथा फ्रांसीसी सहायता का वचन ले लिया तथा कर्नाटक पर जुलाई, 1780 में आक्रमण करके अर्काट पर अधिकार कर लिया।
  • तत्पश्चात हेक्टर मुनरों की सेना को पोलीलुर नामक स्थान पर हरा दिया।
  • किंतु वारेन हेस्टिंग्स द्वारा सर आयरकूट के अधीन भेजी गई सेना ने जून, 1781 से सितंबर, 1781 के मध्य हैदर अली को पोर्टोनोवा, पोलीलुर तथा सोलिंगपुर में परास्त किया।
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