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देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का 84 साल की उम्र में निधन

बीति दिनांक 31 अगस्त 2020 को हमारे भारत के सर्वसम्मानित व्यक्ति भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का देहावसान हो गया और वह चिर निद्रा में विलीन हो गये। यह बड़े दुख की बात है कि इतने सम्मानीय व्यक्ति का इतनी जल्दी इस दुनिया से चले जाना |हम सभी पूर्ण श्रद्धाभाव में उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि प्रदान करते है तथा उनके मन की शान्ति की ईश्वर से कामना करते हैं।

आइये जानते हैं उनके व्यक्तिगत जीवन के संदर्भ में-

प्रणव जी का जन्म 11 दिसंबर 1935 की पश्चिम बंगाल के बीरभूमि नामक जिले में हुआ था तथा उनके गाँव का नाम मिराती था। इनके पिता का नाम कामदा किंकर मुखर्जी था तथा माता का नाम राजलक्ष्मी मुखर्जी था। 

इनके पिता एक स्वतन्त्रता सेनानी थे |

प्रणब जी ने अपनी MA (राजनीतिशास्त्र और इतिहास विषय) में कलकत्ता विश्वविद्यालय से की थी तथा यही से LLB की डिग्री प्राप्त की |

अपने कैरियर की शुरूआत पोस्ट एंड टेलेग्राफ आफिस से की थी जहाँ वे क्लर्क थे।

अपने राजनैतिक कैरियर की शुरूआत की शुरूआत 1969 में कांग्रेस का टिकट लेकर राज्यसभा का सद्सय बन गये और थोड़े समय में ही इंदिरा जी के चहेते बन गये तथा सन 1982 से 1984 तक वित्त मंत्री का पद भी सम्भाला

पी निसिम्हा राव जी द्वारा प्रणब दा को योजना आयोग का प्रमुख बना दिया गया तथा कुछ समय बाद केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और विदेश मंत्रालय का कार्य सम्भाला।

पी निसिम्हा राव जी द्वारा प्रणब दा को योजना आयोग का प्रमुख बना दिया गया तथा कुछ समय बाद केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और विदेश मंत्रालय का कार्य सम्भाला।

अपने राजनैतिक कैरियर की शुरूआत की शुरूआत 1969 में कांग्रेस का टिकट लेकर राज्यसभा का सद्सय बन गये और थोड़े समय में ही इंदिरा जी के चहेते बन गये तथा सन 1982 से 1984 तक वित्त मंत्री का पद भी सम्भाला |

सन 1999 से 2012 तक केंद्रीय चुनाव आयोग के अध्यक्ष भी रहे तथा 1997 में प्रणब दा को भारतीय संसद ग्रुप द्वारा उत्कृष्ट सांसद का खिताब दिया गया।

प्रणब दा को गाँधी परिवार का वफादार माना जाता था जिसके फलस्वरूप इन्हें वर्ष 1998-99 में आल इण्डिया कांग्रेस कमेटी का महासचिव बना दिया गया।

25 जुलाई 2012 को उन्होने भारत के 13 वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण की तथा देश के पहले बंगाली राष्ट्रपति बने।

वर्ष 2019 में इन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

प्रणब दो ने अपने जीवन के 40 साल भारतीय राजनीति को समर्पित किये।

इनके द्वारा कुछ पुस्तकें भी लिखी गयी है-

मिडटर्म पोल – 1969

इमर्जिंग डाइमेरान्स ऑफ इंडियन इकोनामी – 1984

ऑफ द ट्रैक – 1987

सागा ऑफ स्ट्रगल एंड सैक्रिफाइस

चैलेंज बिफोर दी नेरस – 1992

द ड्रामेटिक डिकेड : द डेज ऑफ इंदिरा गाँधी इयर्स – 2014




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