केवल 1 सही है
केवल 2 सही है
1 और 2 दोनों सही है
इनमें से कोई नहीं
हाल ही में मणिपुर के चाक-हाओ अर्थात काले चावल तथा गोरखपुर टेराकोटा को 'भौगोलिक संकेतक' का टैग दिया गया।
चाक-हाओ एक सुगंधित चिपचिपा चावल है जिसकी मणिपुर में सदियों से खेती की जा रही है।
इसका उपयोग सामान्यत: सामुदायिक दावतों में किया जाता है तथा इन दावतों में चाक-हाओ की खीर बनाई जाती है।
चाक-हाओ का पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में भी उपयोग किया जाता है।
चावल की इस किस्म में रेशेदार फाइबर की अधिकता होने के कारण इसे पकाने में चावल की सभी किस्मों से अधिक, लगभग 40-45 मिनट का समय लगता है।
गोरखपुर का टेराकोटा कार्य सदियों पुरानी कला है जिसमें जहाँ स्थानीय कारीगरों द्वारा विभिन्न जानवरों जैसे कि घोड़े, हाथी, ऊँट, बकरी, बैल आदि की मिट्टी की आकृतियाँ बनाई जाती हैं।
पूरा काम नग्न हाथों से किया जाता है तथा रंगने के लिये प्राकृतिक रंग का उपयोग करते हैं, जिसकी चमक लंबे समय तक रहती है।
1,000 से अधिक प्रकार के टेराकोटा के प्रकार यहाँ बनाए जाते हैं।
Post your Comments