उत्प्रेक्षा
श्लेष
यमक
रुपक
रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरै, मोती मानुस चून। यहाँ पानी के तीन अर्थ है - कांति, आत्म-सम्मान और जल। इस प्रकार श्लेष अलंकार है, क्योंकि पानी शब्द एक ही बार प्रयुक्त है तथा उसके अर्थ तीन हैं। अतः यहाँ श्लेष अलंकार है। उत्प्रेक्षा - साखी सोहत गोपाल के, उर गुंजन की माल। बाहर सोहत मनु पिये, दावानल की ज्वाल।। रुपक - पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
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