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सोरठा
चौपाई
दोहा
बरवै
उपर्युक्त पंक्तियों में दोहा छन्द है। भावार्थ : हे संकट मोचन पवनकुमार ! आप संकट दूर करने वाले तथा, आप आनन्द मंगल के स्वरुप हैं। हे देवराज आप श्रीराम, लक्ष्मण और सीताजी सहित मेरे हृदय में निवास कीजिए।
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