कलकत्ता समझौता
लंदन समझौता
पूना समझौता
लखनऊ समझौता
16 अगस्त 1932 को रैम्जे मैक्डोनॉल्ड ने अपने सांप्रदायिक निर्णय (कम्युनल अवॉर्ड) की घोषणा की। इस अधिनिर्णय के तहत मुसलमानों, यूरोपीयों तथा सिक्खों, के साथ-साथ दलित वर्गों के लिए भी पृथक निर्वाचन-मंडल का प्रावधान था। इसके विरोध में गांधीजी 20 सितंबर को आमरण अनशन पर बैठ गए। अंतत: 24 सितम्बर, 1932 को पूना में एक समझौता हुआ, जिसमें को पूना में एक समझौता हुआ, जिमें दो शर्तों के आधार पर संयुक्त निर्वाचन-मंडल बनाए जाने के संबंध में सहमति हुई। ये दो शर्तें थी-प्रथमत: विभिन्न प्रांतीय विधानमंडलों में दलित वर्गों के लिए 148 सीटें आरक्षित की गई जबकि सांप्रदायिक अधिनिर्णय में केवल 71 सीटों की व्यवस्था थी। दूसरे केंद्रीय विधानमंडल में सामान्य वर्ग की सीटों में से 18 प्रतिशत सीटें दलित वर्गों के लिए आरक्षित की गई।
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