बेरुबारी
सज्जन सिंह
गोलकनाथ
केशवानंद भारती
बेरुबारी यूनियन (1960) के वाद में सर्वोच्च न्यायालय ने सर्वप्रथम घोषित किया कि उद्देशिका (प्रस्तावना) संविधान का अंग नहीं है। किंतु ‘केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य’ के वाद में सर्वोच्च न्यायालय ने उपर्युक्त निर्णय को पलटते हुए उद्देशिका (प्रस्तावना) को संविधान का भाग मान लिया।
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